चतुर्थी के दिन चैत्र नवरात्रि के चौथे स्वरूप माँ कूष्मांडा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि माँ
पंचमी के दिन चैत्र नवरात्रि के पांचवें स्वरूप माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है। माँ स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय
षष्ठी के दिन चैत्र नवरात्रि के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। माँ कात्यायनी शक्ति, साहस
सप्तमी के दिन चैत्र नवरात्रि के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। माँ कालरात्रि को देवी
अष्टमी के दिन चैत्र नवरात्रि के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की पूजा की जाती है। माँ महागौरी को अत्यंत
नवमी के दिन चैत्र नवरात्रि के नौवें और अंतिम स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। माँ सिद्धिदात्री
माना जाता है कि इस मंत्र का नियमित जाप करने से माता संतोषी की कृपा प्राप्त होती है और
संतोषी माता का व्रत हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत्॥1॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत्॥1॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूं लोक फैली उजियारी॥
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
जटा टवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम्।
डमड्ड डमड्ड डमड्ड मन्निनाद वड्डमर्वयं
चकार चण्ड ताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥
भगवान शिव को सनातन धर्म में संहार और पुनर्निर्माण के देवता के रूप में पूजा जाता है।
शिव चालीसा भगवान
श्री श्याम भजन आओ आओ सांवरिया, बेगा आओ जी, मोजी भोग लगाओ। है छप्पन भोग तैयार जी, थारा टाबरियां
खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक) को प्रसन्न करने के लिए सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली मंत्र “ॐ श्री श्याम देवाय नमः”
स्तुति श्री रामजी की श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम् । नवकंज-लोचन कंज-मुख, कर-कंज पद-कंजारुणम् ॥ कंदर्प
अवतार से पूर्व श्री रामजी की स्तुति जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता । गो द्विज हितकारी जय
श्री श्याम स्तुति हाथ जोड़ विनती करू तो सुनियो चित्त लगाये दस आ गयो शरण में रखियो इसकी लाज
हनुमान चालीसा से क्या लाभ मिलता है, जानें कब, कैसे और क्यों करें पाठ हनुमान चालीसा न केवल श्रद्धा