चतुर्थी के दिन चैत्र नवरात्रि के चौथे स्वरूप माँ कूष्मांडा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि माँ कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति माना जाता है।
इस दिन माँ की उपासना करने से आयु, स्वास्थ्य और ऊर्जा में वृद्धि होती है। भक्तजन श्रद्धा के साथ व्रत रखते हैं और माँ से सुख-समृद्धि एवं सफलता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
चतुर्थी के दिन वरद विनायकी चतुर्थी भी मनाई जाती है, जो भगवान गणेश जी को समर्पित होती है। इस दिन गणेश जी की पूजा करने से सभी विघ्नों का नाश होता है और कार्यों में सफलता मिलती है।
यह दिन हमें सकारात्मक ऊर्जा, सृजन शक्ति और जीवन में नई शुरुआत करने की प्रेरणा देता है।
