तृतीया के दिन चैत्र नवरात्रि के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माँ चंद्रघंटा अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करती हैं, जिस कारण उनका यह नाम पड़ा। वे शौर्य, साहस और वीरता की प्रतीक मानी जाती हैं।
इस दिन माँ की उपासना करने से भय, नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं का नाश होता है। भक्तजन पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं और माँ से शांति, समृद्धि और सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं।
तृतीया के दिन गौरी पूजा का भी विशेष महत्व होता है। माँ गौरी की आराधना से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है और कुंवारी कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
यह दिन हमें साहस, आत्मबल और आत्मविश्वास के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देता है।
