आरती युगल किशोर की कीजै । राधे धन न्यौछावर कीजे ।। देवा ।।
रवि शशि कोटि बदन की शोभा । तेहि निरख मेरा मन लोभा ।।१।।
गौर श्याम मुख निरखत रीझे । प्री का स्वरूप नैन भर पीजे ।।२।।
कंचन थार कपूर की बाती । हरि आये निर्मल भई छाती ।।३।।
फूलन की सेजन फूलन की माला । रतन सिंहासन बैठ नन्दलाला ।।४।।
मोर मुकुट कर मुरली सोहे नटवर वेष देख मन मोहे ।।५।।
थाथा नील पीतपट सारी 1 कुंज बिहारी गिरवर धारी ।।६।।
श्री पुरूषोत्तम गिरवर धारी, आरती करत सकल ब्रजनारी ।।७।।
नन्द लाल वृषभानु किशोरी, परमानन्द स्वामी अविचल जोरी ।।८।।
