शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत्॥1॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो
जटा टवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम्।
डमड्ड डमड्ड डमड्ड मन्निनाद वड्डमर्वयं
चकार चण्ड ताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥
स्तुति श्री रामजी की श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम् । नवकंज-लोचन कंज-मुख, कर-कंज पद-कंजारुणम् ॥ कंदर्प
अवतार से पूर्व श्री रामजी की स्तुति जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता । गो द्विज हितकारी जय
श्री श्याम स्तुति हाथ जोड़ विनती करू तो सुनियो चित्त लगाये दस आ गयो शरण में रखियो इसकी लाज
