शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत्॥1॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो
श्री श्याम भजन आओ आओ सांवरिया, बेगा आओ जी, मोजी भोग लगाओ। है छप्पन भोग तैयार जी, थारा टाबरियां
