आरती मंगलकारी की, पवनसुत अति बलधारी की । गले मे तुलसी की माला, बजावें मिरदंग करताला ।
हृदय में दशरथ के लाला ।
भाल पे तिलक, अनोखी झलक, कथा की ललक ।
मधुर छवि जन हितकारि की, पवनसुत अति बलधारी की आरती मंगलकारी की……..।।
जगत के दुर्लभ जितने काज, कृपा से देते सवहिं नवाज, नाम से भागत भूत-पिशाच ।
राम के दूत, अंजनि के पूत, बड़े मजबूत, कठिन कलि कलिमलहारी की, पवनसुत अति बलधारी की आरती मंगलकारी की……..।।
साधु-संतन के रखवारे, सभी भक्तन के अति प्यारे विराजत भगवत के द्वारे, श्री मंगलकरण, सकलभय हरण, मुदित मन करण,
राम के आज्ञाकारी की पवनसुत अति बलधारी की, आरती मंगलकारी की……..।।
आरती सब जन मिल गावें, कृपा तब हनुमंत की पावें ।
मनोरथ पूरन हो जावे, दया निधि नाम, सकलगुन धाम, ज्ञान की खान, अष्ट सिद्धि-नव निधिकारी की, पवनसुत अति बलधारी की, आरती मंगलकारी की, पवनसुत अति बलधारी की ।।
